VB-G RAM G Bill : ग्रामीण रोजगार को लेकर देशभर में बड़ी हलचल मची हुई है। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि VB-G RAM G Bill कानून बन गया है और इसके तहत ग्रामीणों को 125 दिन के काम की गारंटी मिलेगी। इतना ही नहीं, यह भी कहा जा रहा है कि यह कानून MGNREGA की जगह लेगा। इन दावों ने गांव-गांव में चर्चा तेज कर दी है और लोग जानना चाहते हैं कि आखिर हकीकत क्या है।
सोशल मीडिया पर चल रहे दावों और राजनीतिक बयानबाजी के बीच सच्चाई जानना बेहद जरूरी हो गया है। क्योंकि ग्रामीण रोजगार जैसी योजना सीधे करोड़ों गरीब परिवारों से जुड़ी होती है, ऐसे में आधी-अधूरी या गलत जानकारी लोगों को भ्रमित कर सकती है। आइए समझते हैं इस पूरे मामले की सही और तथ्यपरक स्थिति।
VB-G RAM G Bill को लेकर क्या दावा किया जा रहा है
दावा यह किया जा रहा है कि VB-G RAM G नाम से एक नया विधेयक पास हो गया है, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया जाएगा। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि इस नए कानून में MGNREGA का नाम और ढांचा बदल दिया जाएगा। इन दावों के कारण मजदूर वर्ग में उम्मीद भी बनी है और चिंता भी, क्योंकि MGNREGA दशकों से ग्रामीण रोजगार की रीढ़ मानी जाती रही है।
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MGNREGA की मौजूदा स्थिति
सरकारी रिकॉर्ड और आधिकारिक घोषणाओं के अनुसार, MGNREGA अब भी लागू है और इसके तहत फिलहाल 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाती है। कुछ राज्यों में अतिरिक्त दिनों का प्रावधान राज्य सरकारें अपने संसाधनों से करती हैं, लेकिन केंद्र स्तर पर 125 दिन की गारंटी को लेकर कोई सर्वदेशीय कानून अभी तक अधिसूचित नहीं किया गया है।
सरकार समय-समय पर मजदूरी दर, काम के प्रकार और भुगतान प्रणाली में बदलाव जरूर करती है, लेकिन MGNREGA को पूरी तरह हटाने या बदलने की कोई आधिकारिक अधिसूचना फिलहाल मौजूद नहीं है।
125 दिन के रोजगार की बात कहां से आई
125 दिन के रोजगार को लेकर चर्चा इसलिए तेज हुई है क्योंकि कुछ नीतिगत सुझावों, राजनीतिक भाषणों और मांगों में काम के दिनों को बढ़ाने की बात कही गई थी। कुछ विशेषज्ञ और राज्य सरकारें लंबे समय से यह मांग कर रही हैं कि बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी को देखते हुए काम के दिन बढ़ाए जाएं।हालांकि मांग और कानून बनने में बड़ा अंतर होता है। जब तक केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, तब तक इसे कानून मानना सही नहीं माना जाता।
राजनीतिक विवाद क्यों खड़ा हुआ
इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। विपक्ष का कहना है कि MGNREGA जैसे ऐतिहासिक कानून की पहचान को कमजोर किया जा रहा है, जबकि सरकार का पक्ष यह रहा है कि ग्रामीण रोजगार को और प्रभावी बनाने पर काम किया जा रहा है। नाम बदलने और संरचना बदलने जैसे दावे इसी राजनीतिक टकराव से जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर आधी-अधूरी जानकारी तेजी से फैल रही है।
आम ग्रामीण और मजदूरों को क्या करना चाहिए
ग्रामीण मजदूरों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे केवल आधिकारिक सरकारी सूचना पर ही भरोसा करें। किसी भी नए कानून, योजना या बदलाव की पुष्टि संबंधित मंत्रालय, सरकारी पोर्टल या गजट नोटिफिकेशन से ही होती है। फिलहाल MGNREGA के तहत काम, जॉब कार्ड और भुगतान की प्रक्रिया पहले की तरह ही चल रही है। अगर भविष्य में काम के दिन 125 किए जाते हैं या कोई नया कानून आता है, तो उसकी स्पष्ट और आधिकारिक घोषणा सरकार की ओर से की जाएगी।